कंक्रीट का विस्तार और प्रकृति का अनुशासन
नेपाल की चेतावनी, भारत के लिए सबक (प्रवीण कक्कड़) “विकास रोकना समाधान नहीं, विकास का भूगोल समझना और उसका सम्मान करना ही स्थायी समाधान है।” नेपाल में आई हालिया विनाशकारी बाढ़ को केवल पड़ोसी देश की मौसमी त्रासदी मानकर आगे बढ़ जाना गंभीर भूल होगी। यह हिमालय से आया वह स्पष्ट संदेश है, जिसे भारत के संवेदनशील पर्वतीय राज्यों से लेकर तेजी से फैलते आधुनिक महानगरों तक पढ़ा जाना चाहिए। संदेश सीधा है, प्रकृति विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन उसके प्राकृतिक जलमार्गों को अवरुद्ध करके खड़ा किया गया विकास कभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकता। हिमालयी संकट और साझा चेतावनी 26 अगस्त को नेपाल के सीमावर्ती रासुवा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र को विकराल बना दिया। प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलन ऊंचाई वाले क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर धंसाव की ओर संकेत करते हैं। इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों, ग्लेशियल झीलों और उनसे जुड़े GLOF यानी ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ जैसे खतरों को फिर गंभीर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चिंता इसलिए भी बड़ी ह...