मानसून की विदाई, जलसंकट की दस्तक!
अक्टूबर में टैंकर, तो मई-जून में क्या होगा? ( प्रवीण कक्कड़) कभी सोचा है कि जिस शहर ने स्वच्छता में देश को रास्ता दिखाया , वही शहर आने वाले महीनों में पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करने लगे तो क्या होगा ? जिस इंदौर में अक्टूबर तक बारिश की यादें ताजा रहती थीं , वहां मानसून विदा होते ही टैंकरों की जरूरत पड़ने लगी है। कहीं बोरवेल जवाब दे रहे हैं , कहीं तालाबों का जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। सवाल केवल इतना नहीं कि इस बार बारिश कम क्यों हुई ? बड़ा सवाल यह है कि क्या हम आने वाली गर्मियों के लिए तैयार हैं ? क्योंकि जलसंकट अचानक नहीं आता , पहले संकेत देता है और फिर हमारी लापरवाही की कीमत वसूलता है। इस वर्ष इंदौर में मानसूनी बारिश लगभग 590 मिलीमीटर दर्ज की गई , जबकि सामान्य स्तर करीब 929 मिलीमीटर है। अर्थात लगभग 37 प्रतिशत की कमी। एक अक्टूबर की रिपोर्ट में इसे पिछले 26 वर्षों का दूसरा सबसे सूखा मानसून बताया गया। यह केवल मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं , बल्कि शहर के जल प्रबंधन के लिए गंभीर चेतावनी है। आंकड़े वर्षा की अनिश्चितता दर्शाते हैं। इस समय अब हमें यह समझना होगा कि जल प्रबंधन केवल अच्छी बा...