मीम्स के मुखौटे में छिपा युवाओं का दर्द
कॉकरोच जनता पार्टी' और व्यवस्था का यथार्थ प्रवीण कक्कड़ तपती गर्मियों में भारत के डिजिटल क्षितिज पर एक ऐसा अभूतपूर्व तूफान उठा है, जिसने देश के स्थापित राजनेताओं और नीति-निर्माताओं को हैरत में डाल दिया है। यह तूफान किसी पारंपरिक राजनीतिक दल या रसूखदार चेहरे का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की गलियों से उपजे एक डिजिटल आंदोलन का है— 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP)। 16 मई 2026 को शुरू हुए इस आंदोलन ने महज कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया। ऊपरी तौर पर एक मज़ाकिया मीम और तीखे व्यंग्य जैसा दिखने वाला यह आंदोलन असल में भारत के शिक्षित बेरोजगार युवाओं की गहरी निराशा और व्यवस्था के प्रति उनके संचित आक्रोश की सामूहिक हुंकार है। पुलिस सेवा के अपने लंबे कार्यकाल और प्रशासनिक समन्वय के अनुभवों में मैंने समाज के हर रंग को बहुत करीब से देखा है। वर्दी में रहते हुए मैंने महसूस किया कि कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेशेवर अपराधी नहीं होते; बल्कि वे गुमराह और हताश युवा होते हैं, जिनकी ऊर्जा को सही दिशा और न्यायपरक मंच नहीं मिल पाता। आज जब मैं इस ड...