मदर्स डे : केवल एक दिन नहीं, एक अस्तित्व का उत्सव
बदलता दौर और ममता का शाश्वत स्वरूप “जहाँ में माँ मुस्कुराती है, वहाँ भगवान भी बिना बुलाए चले आते हैं।” (प्रवीण कक्कड़) “माँ के आँचल में जो सुकून मिलता है, वो दुनिया के किसी महल में कहाँ मिलता है। थक जाए जब ज़िंदगी की राहों में इंसान, तो माँ का आशीर्वाद ही फिर हौसला बनता है।” हर साल मई के दूसरे रविवार को जब दुनिया ‘मदर्स डे’ मनाती है, तो यह केवल एक औपचारिक दिवस या सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करने का अवसर नहीं होता। यह उस अनंत ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, जिसने मानवता को जन्म दिया, संवारा और संस्कारों से सींचा। 2026 के इस तेज़, तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संचालित दौर में भी यदि कोई भावना सबसे अधिक मानवीय और जीवंत बनी हुई है, तो वह है, माँ का प्रेम। एक ऐसा प्रेम, जिसे न कोई एल्गोरिदम समझ सकता है और न कोई मशीन दोहरा सकती है। मेरी माँ स्वर्गीय विद्यादेवी कक्कड़ ने मुझे जो संस्कार दिए, जो सीख दी, जो शिक्षा दी और जीवन में आगे बढ़ने का जो साहस दिया — वही आज मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने मुझे केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि जीवन को समझना सिखाया। आज मैं जो कुछ भी हूँ,...