'पिता’: जीवन का 'पहला योग'
21 जून का अद्भुत संयोग : योग दिवस और फादर्स डे आज दो स्तंभ : एक हमें जीवन देता है , दूसरा उसे जीने की कला ( प्रवीण कक्कड़ ) 21 जून एक ऐसा अद्भुत संयोग है , जो केवल तारीखों का मेल नहीं , बल्कि जीवन दर्शन का एक गहरा संदेश है। एक तरफ पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है , तो दूसरी तरफ पिता के सम्मान का पर्व ' फादर्स डे ' । पहली नजर में ये दोनों विषय अलग दिखाई देते हैं , लेकिन यदि हम थोड़ा गहराई से सोचें तो समझ आता है कि पिता और योग दरअसल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। पिता हमारे जीवन का पहला जीवंत योग हैं और योग हमारे अस्तित्व का अदृश्य पिता। योग शब्द संस्कृत की ' युज ' धातु से बना है , जिसका अर्थ है जोड़ना और जीवन में संतुलन लाना। जरा अपने बचपन की ओर लौटिए। जब हम लड़खड़ाते कदमों से खड़े होना सीख रहे थे , तब जिस मजबूत हाथ ने हमें गिरने और संभलने के बीच संतुलन सिखाया , वही हमारे जीवन का पहला ' आसन ' था। पिता जीवन के उस मौन संवाहक की तरह हैं , जो खुद धूप में तपकर हमारे भविष्य को स्थिर आधार देते हैं। जैसे योग का अभ्यास हमें शारीरिक रूप से संतुलित ...