सस्टेनेबल लिविंग का सबसे बड़ा उदाहरण हैं आदिवासी परंपराएँ
हजारों वर्षों की जीवंत सभ्यता का पर्याय आदिवासी समाज 9 अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष ( प्रवीण कक्कड़ ) "जब आप किसी आदिवासी समुदाय को देखते हैं, तो आप केवल लोगों का एक समूह नहीं देखते, बल्कि हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने वाली एक जीवंत सभ्यता को देखते हैं। उन्हें समझने के लिए केवल आँखें नहीं, हृदय की दृष्टि चाहिए।" 9 अगस्त को पूरा विश्व आदिवासी दिवस मना रहा है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने इसकी थीम "स्वदेशी (आदिवासी) दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा" निर्धारित की है। यह थीम केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के उस पारंपरिक ज्ञान, जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे रिश्ते को सम्मान देने का संदेश भी देती है। वास्तव में यही वह ज्ञान है, जिसने सदियों से मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा है। भारत के आदिवासी समाज को करीब से देखने का अवसर मिलने के कारण मुझे हमेशा लगा है कि यह थीम हमारे जनजातीय जीवन पर भी पूरी तरह सार्थक बैठती है। अलीराजपुर की धरती पर पहला कदम विश्व आदिवासी दिवस पर मेरा मन अनायास ही चा...