"दहशत के धुएं से वतन के गुलाल तक"
दुबई में अनिश्चितता के साये से सुरक्षित घर वापसी की दास्तां (प्रवीण कक्कड़) दुनिया कितनी भी आधुनिक हो जाए, लेकिन जब आसमान से बारूद बरसने की आहट सुनाई देती है, तो इंसान को सिर्फ अपना घर और अपनी मिट्टी याद आती है। हाल ही में मेरी दुबई यात्रा के दौरान कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ, जिसने मुझे जीवन और विश्वास के नए अर्थ समझा दिए। यह कहानी केवल एक यात्रा की नहीं, बल्कि अनिश्चितता के साये से निकलकर होली पर अपनों के बीच पहुंचने की दास्तां है। जब उत्सव की रोशनी पर युद्ध की छाया पड़ी हम दुबई में एक पारिवारिक समारोह का आनंद ले रहे थे। शहर अपनी पूरी चमक-धमक के साथ जगमगा रहा था। लेकिन अचानक, ईरान-इज़राइल संघर्ष की खबरों ने हवाओं में एक भारीपन भर दिया। पाम क्षेत्र के जिस होटल में हम ठहरे थे, उससे कुछ ही दूरी पर जब 'ड्रोन अटैक' की गूँज सुनाई दी, तो पल भर के लिए समय मानो ठहर गया। यूं तो यूएई का डिफेंस सिस्टम किसी अभेद्य किले की तरह है जो दुश्मनों के मंसूबों को आसमान में ही धूल चटा देता है, लेकिन बारूद की गंध उत्सव के माहौल को अनिश्चितता में बदलने के लिए काफी थी। हमने तुरंत एक सुरक्षित वि...