हम बच्चों को सिर्फ व्यस्त कर रहे हैं या सफल भी बना रहे हैं?
सर्टिफिकेट बढ़ रहे हैं लेकिन बचपन घट रहा है (प्रवीण कक्कड़) गर्मियों की तपती दोपहरों के बीच इन दिनों घरों में एक अजीब सी हलचल दिखाई देती है। कैलेंडर कहता है कि बच्चों की गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं, लेकिन बच्चों के चेहरे और उनकी दिनचर्या कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक समय था जब यही छुट्टियां नानी के घर की मस्ती, आम के बागों की खुशबू, धूल भरे मैदानों में खेल, रिश्तों की गर्माहट और जीवन के सहज पाठ सीखने का अवसर होती थीं। आज जब मैं अपने आसपास के बच्चों को देखता हूं तो लगता है कि उनके पास पहले से कहीं अधिक सुविधाएं और अवसर हैं, लेकिन समय, स्वतंत्रता और बचपन लगातार कम होता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या हम बच्चों को जीवन के लिए तैयार कर रहे हैं या सिर्फ उपलब्धियों की दौड़ के लिए? आज की छुट्टियां परिवार, संस्कार और अनुभवों की खुली पाठशाला बनने के बजाय समर कैंप, कोडिंग, रोबोटिक्स, स्विमिंग, ट्यूशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के अंतहीन टाइम-टेबल में सिमटती जा रही हैं। आठ-दस साल का बच्चा सुबह से शाम तक एक क्लास से दूसरी क्लास के बीच दौड़ रहा है, मानो वह किसी भविष्य की कॉर्पोरेट परियोजना की तैया...