संघर्ष की विरासत, सामर्थ्य का वर्तमान और संकल्पित भविष्य
तिरंगे की छांव में 80वां स्वतंत्रता दिवस यह सिर्फ छुट्टी का नहीं, अपनी आजादी को महसूस करने का दिन है (प्रवीण कक्कड़) 15 अगस्त 1947 केवल औपनिवेशिक शासन के अंत की तारीख नहीं है। यह सदियों के संघर्ष, असंख्य बलिदानों और करोड़ों भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति से अर्जित उस स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसने भारत को अपने भाग्य का स्वयं निर्माता बनाया। तिरंगा केवल हमारी संप्रभुता का प्रतीक नहीं, बल्कि अतीत के संघर्ष, वर्तमान के सामर्थ्य और भविष्य की आकांक्षाओं को जोड़ने वाला राष्ट्रीय सूत्र है। आज जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस और 79वीं वर्षगांठ मना रहा है, तब स्वतंत्रता दिवस को केवल एक छुट्टी का अवसर मत समझिए। यह दिन है ठहरकर अपनी आजादी को महसूस करने का, उन बलिदानों को याद करने का जिनकी बदौलत हम आज स्वतंत्र हैं। अपने आसपास जहां भी तिरंगा फहराया जा रहा हो, वहां जरूर पहुंचिए, राष्ट्रगान में शामिल होइए और स्वयं से एक सवाल पूछिए - जो भारत हमें हमारे पूर्वज सौंप गए, उसे और बेहतर बनाकर अगली पीढ़ी को सौंपने के लिए हम क्या कर रहे हैं? बलिदानों की नींव पर खड़ा भारत भारत की स्वतंत्रता किसी एक आंदोल...