बदलती दुनिया, बढ़ता तनाव: हमारे लिए 'वेक-अप कॉल'
संकट के बीच भय नहीं भविष्य को चुनें ईरान-इजराइल की जंग और भारत (प्रवीण कक्कड़) दुनिया का इतिहास गवाह है कि हर बड़ा संकट केवल भय और अस्थिरता ही नहीं लाता, बल्कि अपने साथ संभावनाओं के नए द्वार भी खोलता है। आज पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। तेल की तपिश से लेकर शेयर बाजार की हलचल तक, हर तरफ अनिश्चितता का धुआँ दिखाई दे रहा है। लेकिन एक सजग हिंदुस्तानी के लिए यह समय केवल चिंतित होने का नहीं, बल्कि अपनी रणनीति को नया रूप देने और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने का है। यदि हम स्थिति को व्यापक दृष्टि से देखें, तो यह दौर हमें आर्थिक अनुशासन, स्वदेशी मजबूती और दीर्घकालिक सोच की ओर प्रेरित करता है। आर्थिक प्रहार: चुनौती जो हमारे द्वार पर वैश्विक अस्थिरता का असर सबसे पहले हमारी अर्थव्यवस्था और हमारी जेब पर दिखाई देता है। ऊर्जा का दबाव: कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहती। इससे परिवहन महंगा होता है, उत्पादन लागत बढ़ती है और महंगाई की एक पूरी श्रृंखला शुरू हो जाती है। बाजार की अस्थिरता:...