विघ्नहर्ता के चार वरदान, जो माँगने नहीं, अपनाने हैं
श्रीगणेश से सीखिये सुनना, चुनना, बदलना और आगे बढ़ना (प्रवीण कक्कड़) गणेश चतुर्थी पर हम भगवान श्री गणेश से सुख, समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों से मुक्ति का आशीर्वाद माँगते हैं लेकिन इस बार एक प्रश्न स्वयं से भी पूछिए, जिस विघ्नहर्ता को हम अपने जीवन की बाधाएँ दूर करने के लिए पूजते हैं, क्या हमने कभी यह समझने की कोशिश की कि उनका स्वरूप हमें स्वयं बाधाओं से निपटने की कितनी बड़ी कला सिखाता है? श्री गणेश केवल आराधना के देवता नहीं, जीवन-प्रबंधन की अद्भुत प्रेरणा भी हैं। उनका स्वरूप मानो कहता है कि जीवन में हर समस्या के समाधान के लिए चमत्कार की प्रतीक्षा मत कीजिए, अपने भीतर सही गुण विकसित कीजिए। संयोग से पर्व है चतुर्थी का, इसलिए इस गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता से जीवन के चार सूत्र लेते हैं। ये चार वरदान ऐसे हैं, जिन्हें माँगना नहीं, अपनाना है। पहला सूत्र - शोर के युग में ‘सुनना’ सीखिए गणेशजी के विशाल कान हमें सबसे पहली और आज शायद सबसे जरूरी सीख देते हैं - बोलने से पहले सुनिए। आज हमारे पास अभिव्यक्ति के जितने साधन हैं, शायद सुनने का धैर्य उतना ही कम हुआ है। सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति कुछ कहना चाह...