री-स्किलिंग: 'आउटडेटेड' नहीं, 'अपडेटेड' कहलाने की जिद
डिग्री पुरानी, हुनर नया: वक्त की मांग है आप अपना 'बेहतर वर्जन' बनें (प्रवीण कक्कड़) कल्पना कीजिए, अगर आपकी आज की सबसे बड़ी ताकत कल आपकी सफलता की सीढ़ी ही न बन पाए तो? आज का विश्व इसी मोड़ पर खड़ा है - जहाँ बदलाव की रफ्तार केवल ‘तेज’ नहीं, बल्कि ‘विस्फोटक’ है। आज का युवा वर्षों की कड़ी मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाएं पास करता है और एक डिग्री हासिल करता है, लेकिन जब तक वह नौकरी या व्यापार की दहलीज पर कदम रखता है, उसकी वह डिग्री 'आउटडेटेड' होने की कगार पर होती है। बदलते वक्त के साथ खुद को 'अपडेट' करने की जिद ही आपको रेस में बनाए रखती है। यहाँ डिग्री की एक्सपायरी डेट हो सकती है, लेकिन आपके भीतर सीखने का जज्बा ही वह महामंत्र है जिसे हम 'री-स्किलिंग' कहते हैं। इतिहास गवाह है कि परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है, लेकिन आज परिवर्तन की गति अभूतपूर्व है। कल की विशेषज्ञता आज की सामान्य जानकारी बन चुकी है। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि आपके पास कितनी डिग्रियां हैं, बल्कि यह है कि क्या आप आज कुछ नया सीखने के लिए तैयार हैं? ‘री-स्किलिंग’ अब केवल कॉरपोरेट जगत का कोई भारी-भरकम शब्...