नवरात्रि : माँ की “आराधना” से “शक्ति” की पहचान तक
नौ दिनों की साधना, नौ संकल्प और जीवन को नई दिशा देने का अवसर (प्रवीण कक्कड़) कभी सोचा है कि जिस शक्ति के सामने हम सिर झुकाते हैं, यदि उसका एक अंश भी अपने जीवन में उतार लें, तो हमारी दुनिया कितनी बदल सकती है? हम माँ दुर्गा से साहस माँगते हैं, लेकिन अपने डर से लड़ने में हिचकते हैं। सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं, लेकिन अपने विचारों को समृद्ध बनाना भूल जाते हैं। जीवन के संकट दूर करने की कामना करते हैं, लेकिन अपनी कमजोरियों पर विजय पाने का प्रयास नहीं करते। शायद नवरात्रि का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जिस शक्ति को हम मंदिरों में खोजते हैं, उसका प्रकाश हमारे भीतर भी मौजूद है। आवश्यकता केवल उसे पहचानने और जागृत करने की है। आज से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व प्रारंभ हो रहा है। घरों में घटस्थापना होगी, मंदिरों में आरती गूँजेगी, उपवास और साधना का क्रम शुरू होगा। वातावरण में श्रद्धा, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। लेकिन इन नौ दिनों की सबसे सार्थक उपलब्धि क्या होगी? क्या केवल विधि-विधान से पूजा संपन्न कर लेना पर्याप्त है, या माँ की आराधना हमें अपने भीतर कुछ बदलने की प्रेरणा भी देती है? ...