गणतंत्र का गौरव: अधिकारों के आकाश में कर्तव्यों की उड़ान
कर्तव्य पथ पर युवा भारत: संकल्प से सिद्धि का नया अध्याय (प्रवीण कक्कड़) 26 जनवरी केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं है। यह आत्म-मंथन का अवसर है, यह सोचने का कि एक नागरिक के रूप में हम अपने अधिकारों के प्रति जितने सजग हैं, क्या अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतने ही उत्तरदायी हैं। इसी दिन भारत ने स्वयं को एक गणतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया था। हमारे संविधान ने हमें केवल गणतंत्र नहीं दिया, बल्कि एक सशक्त, समावेशी और उत्तरदायी राष्ट्र के निर्माण की साझा जिम्मेदारी भी सौंपी। आज जब भारत एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह जिम्मेदारी सबसे अधिक युवाओं के कंधों पर आ टिकती है। देश का वर्तमान भले ही अनुभव और परंपरा से संचालित हो, लेकिन उसका भविष्य युवाओं की सोच, उनके आचरण और उनके मूल्यों से ही आकार लेगा। गणतंत्र की मजबूती का असली पैमाना यही है कि उसका युवा वर्ग अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को कितनी गंभीरता से स्वीकार करता है। कर्तव्य की पाठशाला: समाज की सामूहिक जिम्मेदारी कर्तव्यों की समझ केवल पाठ्यपुस्तकों से नहीं आती। इसके लिए परिवार, समाज और संस्थ...