"2026 की दहलीज: यादों का बोझ उतारिए, संकल्पों को पंख दीजिए
नया साल तारीख नहीं, सोच बदलने का अवसर है (प्रवीण कक्कड़) हर नया साल एक सवाल लेकर आता है—क्या बदलेगा? लेकिन असल सवाल यह होना चाहिए कि हम क्या बदलेंगे। कैलेंडर बदलने से हालात नहीं बदलते, हालात बदलते हैं सोच, आदत और दृष्टि से। बीता हुआ साल अगर सिर्फ अफसोस, शिकायत और पछतावे के साथ विदा किया गया, तो नया साल भी वही कहानी दोहराएगा। 2026 की दहलीज पर खड़े होकर यह समझना ज़रूरी है कि बीते साल की असफलताएँ बोझ नहीं हैं, वे अनुभव हैं और अनुभव वही पूंजी है जिससे भविष्य की इमारत खड़ी होती है। नया साल उम्मीद का पोस्टर नहीं, आत्मसंयम और आत्मविश्वास की कार्ययोजना है। गलतियों को सबक में बदलने का समय 2025 ने हममें से कई लोगों को निराश किया होगा, किसी के सपने अधूरे रह गए, किसी को अपनों से ठेस मिली, तो किसी को अपने ही फैसलों पर पछतावा हुआ। लेकिन बीते साल को अगर हम केवल नुकसान की सूची मानकर याद रखें, तो हम खुद के साथ अन्याय कर रहे हैं। गलतियाँ जीवन का अंत नहीं होतीं, वे दिशा संकेत होती हैं। जो खो गया, उसे बार-बार याद करना मानसिक बोझ बढ़ाता है, लेकिन उस अनुभव से मिली सीख जीवन भर साथ रहती है। पुरानी कड़वाहटों को...