जवाबदेही का अकाल: पाइपलाइनों में दौड़ता ज़हर

स्वच्छता का ‘नंबर 1’ तमगा और भागीरथपुरा की सिसकियाँ

“सवाल व्यवस्था से भी और खुद से भी: क्या हम केवल हादसों के बाद जागने वाले समाज बन गए हैं?”

सिर्फ अवॉर्ड काफी नहीं, नागरिकों को सुरक्षित जीवन का अधिकार चाहिए

(प्रवीण कक्कड़)

देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा इंदौर को गर्व देता है। यह गौरव वर्षों की मेहनत, जनभागीदारी और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम है। लेकिन जब इसी शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण लोगों की असमय मृत्यु होती है और सैकड़ों नागरिक अस्पतालों में जीवन के लिए संघर्ष करते हैं, तो यह तमगा आत्ममंथन की मांग करने लगता है। यह केवल एक मोहल्ले की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जवाबदेही पर लगा एक गंभीर प्रश्नचिह्न है।

खतरे की घंटी: पुरानी पाइपलाइनें और चूक

स्थानीय रिपोर्टों और चिकित्सकीय तथ्यों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संकट आकस्मिक नहीं था। हैजा (Cholera) और गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Gastroenteritis) जैसे जल-जनित रोगों का फैलना इस बात की पुष्टि है कि पेयजल आपूर्ति प्रणाली में गंभीर चूक हुई है। इंदौर का जल-आपूर्ति नेटवर्क कई दशकों पुराना है, जहाँ अनेक स्थानों पर सीवेज और पेयजल लाइनें एक-दूसरे के खतरनाक रूप से करीब हैं। लीकेज ऑडिट और नियमित वाटर सैंपलिंग जैसी प्रक्रियाएँ कागज़ों पर तो दर्ज हैं, लेकिन ज़मीन पर उनकी सुस्ती अब जानलेवा साबित हो रही है।

बिखरती जवाबदेही का ढाँचा

सवाल किसी एक विभाग या व्यक्ति पर उंगली उठाने का नहीं, बल्कि उस ढाँचे का है जहाँ जिम्मेदारी अक्सर बिखर जाती है। यदि अवैध निर्माण या गलत पाइपलाइन बिछाने का काम होता है, तो निगरानी के स्तर पर अधिकारी चुप क्यों रहते हैं? शहरी विकास का कड़वा सच यह है कि पहले सड़कें बनती हैं, फिर उन्हें खोदकर पाइपलाइनें डाली जाती हैं। समन्वय की यह कमी न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी है, बल्कि नागरिकों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।

जिम्मेदारी का आत्ममंथन जरूरी

इस पूरी श्रृंखला में एक असहज सवाल हम खुद से भी पूछने से क्यों कतराते हैं? क्या हम एक ऐसे समाज में बदलते जा रहे हैं जो हादसों के बाद जागता है, रिपोर्ट्स के बाद विचलित होता है और कुछ दिनों में फिर सब भूल जाता है? जब मोहल्ले में अवैध निर्माण होता है, जब नालियाँ पेयजल पाइप से सटकर बहने लगती हैं, जब सड़क खोदकर महीनों छोड़ दी जाती है—तब हमारी आवाज़ क्यों नहीं उठती? क्या नागरिक होने का अर्थ केवल वोट डालना और फिर हर गलती के लिए व्यवस्था को कोसते रहना भर है?

संवैधानिक संकट और न्यायपालिका

संविधान का अनुच्छेद 21 नागरिकों को केवल जीवित रहने का नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है—जिसमें स्वच्छ जल अनिवार्य तत्व है। मानवाधिकार आयोग और न्यायालय द्वारा इस मामले में संज्ञान लेना इसी संवैधानिक चेतना की अभिव्यक्ति है। लेकिन प्रश्न यही है—क्या केवल नोटिस, जांच और स्टेटस रिपोर्ट से भविष्य की त्रासदियों को रोका जा सकेगा?

अब कागज़ों से आगे निकलना होगा

इस घटना से सबक लेते हुए अब आधे-अधूरे उपायों से आगे बढ़ना होगा:

डिजिटल ट्रांसपेरेंसी (पब्लिक डैशबोर्ड):

हर वार्ड की जल गुणवत्ता रिपोर्ट रियल-टाइम में सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो। नागरिक जान सकें कि उनके नल का पानी कितना सुरक्षित है।

थर्ड पार्टी सेफ्टी ऑडिट:

नगर निगम की आंतरिक जांच के बजाय स्वतंत्र तकनीकी संस्थाओं से हर छह महीने में पाइपलाइन और क्रिटिकल पॉइंट्स का सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य हो।

GIS मैपिंग और समयबद्ध रिप्लेसमेंट:

दशकों पुरानी पाइपलाइनों के लिए स्पष्ट मास्टर प्लान बने और Geographic Information System मैपिंग से जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान हो।

वित्तीय और कानूनी जवाबदेही:

केवल निलंबन नहीं—लापरवाही से हुई जनहानि के मामलों में ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

इंदौर की पहचान केवल पुरस्कारों और रैंकिंग से तय नहीं होगी। उसकी असली पहचान उसके नागरिकों के सुरक्षित और स्वस्थ जीवन से बनेगी। भागीरथपुरा की यह त्रासदी एक अंतिम चेतावनी है व्यवस्था के साथ-साथ समाज को भी अपनी भूमिका समझनी होगी। अब वक्त है कि व्यवस्था ‘नंबर 1’ के मंच से नीचे उतरकर, जन-हित की कठोर ज़मीन पर सच के साथ काम करे—ताकि विकास की चमक में जीवन का अधिकार धुंधला न पड़ जाए। विकास की चमक तभी सार्थक है, जब वह अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सुरक्षा और विश्वास पहुँचा सके।

टिप्पणियाँ

  1. नेता ,अधिकारी और जनता सभी की जवाबदारी हो,तभी समस्या ख़त्म होगी 🙏🏻

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  2. You are right sir. The process of cleanliness is not one sided, all are involved in it. indore won several times fir cleanliness but nobody penetrated deep into the sever lines that run as the veins under the surface. It is the duty of the municipal corporation to repair all underground pipe-lines. Commendable focus on the current situation. May your write-up be understood by the responsible people. Congratulations for this eye- opening message 💐

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