उड़ान, उजास और उत्तरायण: आपकी जिंदगी का नया अध्याय
मकर संक्रांति पर विज्ञान और संस्कृति का महासंगम
(प्रवीण कक्कड़)
हमारी संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि गहन विज्ञान का उत्सव है। जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है, तब वह केवल दिशा नहीं बदलता, बल्कि पृथ्वी पर ऊर्जा, ताप और जीवन-चक्र के एक नए अध्याय का अभिषेक करता है। हमारे पूर्वजों ने इसे ‘उत्तरायण’ कहा जो खगोलीय रूप से अंधकार के संकुचन और 'उजास' के विस्तार का उद्घोष है। यह पर्व प्रमाण है कि भारत ने युगों पहले ही समझ लिया था कि ब्रह्मांड की गतियां किस प्रकार हमारी चेतना को एक नई 'उड़ान' और जीवन के प्रवाह को नया आकार देती हैं।
जिस प्रकार सूर्य अपनी निरंतर यात्रा से भीषण शीत को भी पराजित कर देता है, ठीक वैसे ही आपके जीवन की कठिन परिस्थितियाँ भी आपके अटूट संकल्प के सामने पिघल सकती हैं। सूर्य कभी विश्राम नहीं करता; वह हमें सिखाता है कि लक्ष्य चाहे क्षितिज जितना दूर हो, निरंतरता ही सफलता का एकमात्र अचूक सूत्र है।
संगठन की शक्ति और वाणी की मिठास
मकर संक्रांति के तिल-गुड़ केवल मिष्ठान नहीं, बल्कि सफल जीवन के मैनेजमेंट सूत्र हैं। तिल का सूक्ष्म दाना जब गुड़ के साथ मिलता है, तो वह एक मीठा और शक्तिशाली मेल बनता है, यह सिखाता है कि व्यक्तिगत प्रतिभा तब 'अजेय' बनती है, जब उसमें संगठन और मधुर व्यवहार का सामंजस्य हो।
पतंग: संतुलन और मूल्यों की उड़ान
आसमान में अठखेलियां करती पतंग जीवन का सबसे सुंदर रूपक है: उड़ान: आपके सपनों जैसी असीमित। डोर: आपके संस्कारों जैसी अटूट। पतंग कितनी भी ऊँची क्यों न हो, यदि वह अपनी 'जड़' (डोर) से कट जाए, तो पतन निश्चित है। इसलिए, सफलता के शिखर पर पहुँचते समय अपने विवेक और जड़ों को मजबूती से थामे रखें। याद रखें विपरीत हवाएं पतंग को काटने के लिए नहीं, बल्कि उसे और अधिक ऊँचाई तक धकेलने के लिए चलती हैं।
आज संकल्प लीजिए
उत्तरायण केवल पंचांग की एक तिथि नहीं, यह आपके दृष्टिकोण के कायाकल्प का दिन है। अपनी सोच के क्षितिज को विस्तृत कीजिए, आलस्य की बेड़ियाँ तोड़िए, और अपने भीतर उस ‘सूर्य’ को जाग्रत कीजिए जो कभी हारना नहीं जानता। उठिए! अपने सपनों को नई उड़ान दीजिए क्योंकि अब प्रकाश का साम्राज्य शुरू हो चुका है।


Very inspiring article on the significance of Makar-sankranti
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