संदेश

होली : अंतर्मन में बिखेरिये खुशियों के रंग

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( प्रवीण कक्कड़) आओ होलिका दहन में हम बुरी प्रवृत्तियों को जलाकर भस्म कर दें और अपने निर्मल मन में खुशियों के रंग भर लें। अंतर्मन में खुशियों के रंग बिखेरिये । जैसे ही आप ऐसा करेंगे तो बाहरी दुनिया भी रंगीन हो जाएगी। यही होली की सच्ची भावना है। उत्सव धर्मिता का यह सर्वथा नया आयाम है। प्रेम का यह सबसे परिष्कृत रूप है। द्वैत से अद्वैत की ओर जाने की यात्रा का यह पहला चरण भी है। अपने अंतर्मन को रंगने का यह सबसे उत्तम अवसर भी है। थोड़ा अभ्यास कीजिए।‌ थोड़ा प्रयास कीजिए। सुनियोजित नहीं तो अनायास कीजिए। आप अंतर्मन को प्रेम के रंगों से सराबोर कर देंगे। तब होली के रंग जितने अंतर में बिखरेंगे उतने ही बाहर भी बिखर जाएंगे। रंगों के पर्व पर आप अंदर और बाहर रंगों से भर उठें यही शुभकामना है। होली दहन कैसे शुरू हुआ यह कहानी पौराणिक है और जन जन को ज्ञात है कि हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। उसने अपने पिता के बार-बार समझाने के बाद भी भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के अनेक उपाय किए किंतु वह सफल नहीं हुआ। अंत में , उसने अपनी बहन होलिका से कहा ...

शिव और शक्ति के मिलन का संयोग है ‘‘महाशिवरात्रि’’

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( प्रवीण कक्कड़ ) “शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि।” आदि शंकराचार्य विरचित सौंदर्यलहरी की यह आरंभिक पंक्तियॉं कहती हैं कि “शक्ति के बिना शिव, अधूरे हैं तथा ऐसी परिस्थिति में उनमें स्पंदन-मात्र की सामर्थ्य भी नहीं है।” भगवान शिव की परम चेतना को सामर्थ्य और गति सौंपनी वाली यह भी मां “शक्ति” हैं। आज महाशिवरात्रि भी है और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस भी। ऐसे में इसे भारतीय दर्शन में शिव और शक्ति के संगम की व्याख्या का सबसे बेहतर अवसर कहा जा सकता है। जिस तरह शिव के बिना सृष्टि अधूरी है, वहीं शक्ति के बिना शिव को अधूरा कहा गया है। जो शिव के दर्शन को जानता है, वह शक्ति यानी नारी के महत्व से परिचित है। करूणा के सागर भगवान भोलेनाथ के स्वरूप से शक्ति के महत्व को समझा जा सकता है, इसीलिए शिव-शक्ति के संयोग में अर्धनारीश्वर  स्वरूप की भी पूजा की जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार वैसे तो साल में कुल 12 शिवरात्रि आती हैं लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि का महत्व विशेष है, क्योंकि इसी दिन शिव और शक्ति का मिलन हुआ था, इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। ...

तरक्की का मूल मंत्र है “आत्म- अनुशासन”

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 (प्रवीण कक्कड़) मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व निर्माण में बहुत से गुण अपनी भूमिका निभाते हैं। इन सारे गुणों में अनुशासन सर्वोपरि है, क्योंकि अनुशासन के अभाव में सद्गुण के भी दुर्गुण बनते देर नहीं लगती लेकिन अनुशासन से भी बड़ी उपलब्धि है आत्मानुशासन। अनुशासन तो व्यवस्था या दूसरे व्यक्ति द्वारा बनाए जाते हैं, जो किसी भी व्यवस्था के संचालन के लिए सभी पर सामूहिक रूप से लागू होते हैं, जबकि आत्म- अनुशासन व्यक्ति खुद अपने ऊपर लागू करता है। दुनिया भर के कुछ सबसे सफल लोग आत्म-अनुशासन का अभ्यास करते हैं। वे दावा करते हैं कि जीवन में उन्हें तरक्की दिलाने में मुख्य भूमिका आत्म-अनुशासन की है। उन्होंने बड़ी शुरुआत नहीं की लेकिन आत्म- अनुशासन के साथ उन्होंने छोटे बदलाव किए और वे उच्च पदों पर पहुंच गए। नियमित जीवन में छोटे-छोटे बदलाव जैसे कि हर दिन एक ही समय पर सोना और जागना, स्वस्थ भोजन करना, व्यायाम करना और लक्ष्य निर्धारित करने से आत्म- अनुशासन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। जीवन के इन छोटे-छोटे लक्षणों से भारी अंतर आ सकता है और यह व्यक्ति को आत्म- अनुशासन का जीवन जीने के लिए प्रोत्साह...

वसंत की बहार के बीच प्रेम का संदेश ‘‘वैलेंटाइन डे’’

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 (प्रवीण कक्कड़) भारत के पास वैसे तो अपने पर्व और त्योहारों की कमी नहीं है, लेकिन हमारा देश इतने खुले स्वभाव का है कि दूसरी संस्कृतियों से शुरू हुई परंपराओं को अपनाने से गुरेज नहीं करता। वैलेंटाइन डे भी भारत के त्योहारों में ऐसा ही एक मेहमान है। दो-तीन दशक से भारत की युवा पीढ़ी का यह प्रिय त्यौहार हो गया है और सामान्य तौर पर इसे स्त्री-पुरुष के प्रेम के पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार 14 फरवरी को आता है और सामान्य तौर पर इस समय भारत में वसंत ऋतु अपने यौवन पर होती है, इस बार तो वसंत पंचमी भी वैलेंटाइन डे के दिन ही आ रही है। लोग अब भूलने लगे हैं, लेकिन किसी जमाने में भारत में मदनोत्सव भी मनाया जाता था। मदनोत्सव में भी प्रेम की ऐसी ही  अभिव्यक्ति का रिवाज था। कौन जाने समय के चक्कर में मदनोत्सव ही वैलेंटाइन डे के रूप में फिर भारत में लौट आया हो लेकिन भारत में प्रेम को कभी सिर्फ एक ढांचे में नहीं बांधा गया। प्रेम के अलग-अलग रूप हैं और हर रूप में ही यह सुंदर है। जिन संत वैलेंटाइन के नाम पर वैलेंटाइन डे मनाया जाता है उन्होंने भी तो प्राणिमात्र में प्रेम की शिक्षा दी थी। इसी...

सफलता की पहली सीढ़ी है "समय का प्रबंधन"

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( प्रवीण कक्कड़ ) समय प्रबंधन एक बहुत ही आवश्यक कौशल है। जो हमारे कार्य और उनके उद्देश्यों को निश्चित योजना के तहत पूरा करता है। समय प्रबंधन से तात्पर्य समय को सही तरीके से उपयोग करने की योजना और प्रबंध की तकनीक है। सरल शब्दों में कहा जाए तो जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने की पहली सीढ़ी समय का प्रबंधन ही है।   आजकल जो चुनौतियां हम सबके सामने हैं, उनमें से एक बड़ी चुनौती है वक्त की कमी। लोग अक्सर यह कहते सुने जाते हैं कि फलां काम करने का उन्हें वक्त ही नहीं मिला या फिर यह कि व्यस्तता इतनी ज्यादा है कि अमुक काम कर ही नहीं पाते। यह कहने के साथ लोग यह कहना भी नहीं भूलते कि काम करने का उनका मन तो बहुत था। हमें पता है कि दिन में 24 घंटे होते हैं, उन्हें बढ़ाया नहीं जा सकता। सोने, खाने, विश्राम और नित्य क्रिया के समय को भी कम नहीं किया जा सकता। जो लोग इसे कम करने का प्रयास करते हैं वे अनावश्यक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जकड़ में आ जाते हैं, तो फिर समय को कैसे साधा जाए। इसके लिए असल में जरूरत है कि समय को उपयोग में कैसे लाया जाए। अगर कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तित्व पर निगाह डा...

शानदार व्यक्तित्व को सेवानिवृत्ति और जन्मदिन की बधाई

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देशभक्ति और जनसेवा के सिद्धांतों को चरितार्थ करते हुए एडिशनल पुलिस कमिश्नर श्री मनीष कपूरिया जी ने पुलिस सेवा में अपनी पारी पूरी की। उन्हें सेवानिवृत्ति पर हार्दिक बधाई। कल कपूरिया जी रिटायर हुए हैं और आज उनका जन्मदिन है। इस संयोग पर मुझे उनके साथ कार्य करने के अनुभव और उनकी प्रेरणाएं याद आ रही हैं। विजय नगर सीएसपी रहने के दौरान मैंने उनके अधीन काम किया। इस दौरान न केवल पुलिस सेवा बल्कि जीवन में भी बहुत कुछ सीखने को मिला। कपूरिया जी ऐसे अधिकारी रहे जो अपने सहकर्मियों की क्षमताओं का सही उपयोग करना जानते थे। मुझे पुलिस सेवा से वीआरएस लेकर जीवन में आगे बढ़ने की सलाह भी उन्हीं ने दी और उनके मार्गदर्शन को स्वीकार करते हुए मैंने 20 साल की पुलिस सेवा के बाद वीआरएस लिया। इसके बाद दिल्ली एवं भोपाल में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद संभाले।   कपूरिया जी एक जिंदादिल , कर्मठ और दूरदर्शी अधिकारी रहे। वे साहित्यप्रेमी , शायर और बैडमिंटन के शानदार खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने विभिन्न पदों पर रहकर कई कीर्तिमान हासिल किए और पुलिस विभाग के साथ ही प्रदेश को भी गौरवान्वित किया। उन्हें सेवानिवृत्ति और जन्मदिन क...

गांधीजी के सिद्धांतों ने विश्व को दिया सत्य और अहिंसा का आधुनिक दर्शन

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(प्रवीण कक्कड़)  आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। गांधीजी दुनिया के ऐसे अनोखे राजनेता हैं, जिन्हें लोग नेता से बढ़कर संत के रूप में याद करते हैं। गांधी जी के सिद्धांतों ने विश्व को सत्य और अहिंसा का आधुनिक दर्शन दिया है। मार्टिन लूथर किंग जूनियर से लेकर बराक ओबामा तक उन्हें आदर्श मानते हैं, भारत ही नहीं पूरे विश्व में न केवल उनके विचारों की व्यापक स्वीकार्यता है, बल्कि उनके सिद्धांतों को प्रासंगिक मानकर उन पर चलने का प्रयास किया जा रहा है। जब भी महात्मा गांधी का नाम लिया जाता है तब सबसे पहले जहन में दो शब्द आते हैं वो हैं सत्य और अहिंसा। गांधी जी ने सत्य के प्रति अडिग रहकर अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया, उन्होंने अपने विचारों से न केवल भारत को आजादी दिलायी, बल्कि समाज में अनेक सुधार भी किए। इसी तरह गांधीजी के अहिंसा का आधुनिक दर्शन दिया। विश्व में पहले किसी विरोध का मतलब होता था हिंसक लड़ाई लेकिन महात्मा गांधी के अहिंसा दर्शन ने इस सोच को बदल दिया। इसी पर लोकतंत्र की नींव रखी गई और इस बात को साबित किया गया कि अब देश रूल ऑफ़ लाॅ से चलेगा न कि रूल ऑफ़ साॅर्ड से। यानी आधुनिक सर...