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पर्यटन: रास्ते जो हमें जीवन जीना सिखाते हैं

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घूमना सिर्फ़ जगह बदलना नहीं, नज़रिया बदलना है विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष (प्रवीण कक्कड़) किसी अनजान शहर में रास्ता भटक जाना कभी-कभी जीवन का सबसे अच्छा सबक बन जाता है। हम किसी से दिशा पूछते हैं, अपनी योजना बदलते हैं और फिर उस जगह तक पहुँचते हैं, जिसे शायद सीधे रास्ते से कभी देख ही नहीं पाते। यात्रा का यही सौंदर्य है। वह हमें मंज़िल तक पहुँचाती है, लेकिन रास्ते में थोड़ा बदल भी देती है। 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस है। पर्यटन की चर्चा प्रायः सुंदर स्थलों, सुविधाओं और तस्वीरों तक सिमट जाती है। जबकि इसका सबसे गहरा प्रभाव यात्री के भीतर होता है। घर से निकलते समय हम अपने साथ अपनी आदतें, धारणाएँ और सोच लेकर चलते हैं। लौटते समय सामान लगभग उतना ही होता है, पर अनुभव कहीं अधिक। हमने कुछ नया देखा होता है, किसी अनजान व्यक्ति से बात की होती है और शायद अपने बारे में भी कुछ ऐसा जाना होता है जो रोज़ की दिनचर्या में कभी सामने नहीं आता। विकल्प खोजना हमें बढ़ाता है आगे यात्रा की पहली सीख है - सब कुछ हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होगा। कभी मौसम बदल जाता है, कभी गाड़ी देर से आती है, तो कभी तय रास्ता बंद मिलत...

पहले मुफ्त की लत, अब नियमों का जाल

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चर्चा, चार्ज और चुनौती : क्या देश में UPI क्रांति का 'हनीमून पीरियड' खत्म हो चुका है?   प्रवीण कक्कड़ सुबह आँख खुलते ही दूध का पैकेट लिया QR कोड स्कैन किया। नुक्कड़ पर चाय पी QR स्कैन किया। दोपहर में सब्जी खरीदी, गाड़ी में पेट्रोल भरवाया, रेस्तरां में खाना खाया या रात को ऑनलाइन शॉपिंग की, बस जेब से मोबाइल निकाला, पलक झपकते ही 'बीप' की आवाज आई और भुगतान हो गया।हालत यह है कि दिन के अंत में जब आप वॉलेट खोलते हैं, तो गांधी जी की तस्वीरों वाले नोट जस के तस मुस्कुराते मिलते हैं, जबकि आपकी जेब से हजारों रुपये का डिजिटल लेन-देन हो चुका होता है। जिस यूपीआई ने हमारी उंगलियों को बिना सोचे-समझे खर्च करने की ऐसी जादुई आदत लगा दी... आज वही यूपीआई अचानक नियमों, चार्जेस और बहसों के एक अजीब चक्रव्यूह में उलझ गया है। आखिर मुफ्त क्रांति के दावों के बीच अचानक यह 'चर्चा, चार्ज और चुनौती' का दौर क्यों शुरू हुआ? आइए समझते हैं इस पूरे खेल के पीछे का सच। भारत की जेब कब मोबाइल में समा गई, हमें पता ही नहीं चला लेकिन अब इसी UPI को लेकर देश में नई बहस छिड़ी है। केंद्र सरकार ने 15 सितंबर को...

विघ्नहर्ता के चार वरदान, जो माँगने नहीं, अपनाने हैं

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श्रीगणेश से सीखिये सुनना, चुनना, बदलना और आगे बढ़ना  (प्रवीण कक्कड़) गणेश चतुर्थी पर हम भगवान श्री गणेश से सुख, समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों से मुक्ति का आशीर्वाद माँगते हैं लेकिन इस बार एक प्रश्न स्वयं से भी पूछिए, जिस विघ्नहर्ता को हम अपने जीवन की बाधाएँ दूर करने के लिए पूजते हैं, क्या हमने कभी यह समझने की कोशिश की कि उनका स्वरूप हमें स्वयं बाधाओं से निपटने की कितनी बड़ी कला सिखाता है? श्री गणेश केवल आराधना के देवता नहीं, जीवन-प्रबंधन की अद्भुत प्रेरणा भी हैं। उनका स्वरूप मानो कहता है कि जीवन में हर समस्या के समाधान के लिए चमत्कार की प्रतीक्षा मत कीजिए, अपने भीतर सही गुण विकसित कीजिए। संयोग से पर्व है चतुर्थी का, इसलिए इस गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता से जीवन के चार सूत्र लेते हैं। ये चार वरदान ऐसे हैं, जिन्हें माँगना नहीं, अपनाना है। पहला सूत्र - शोर के युग में ‘सुनना’ सीखिए गणेशजी के विशाल कान हमें सबसे पहली और आज शायद सबसे जरूरी सीख देते हैं - बोलने से पहले सुनिए। आज हमारे पास अभिव्यक्ति के जितने साधन हैं, शायद सुनने का धैर्य उतना ही कम हुआ है। सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति कुछ कहना चाह...

पीढ़ियाँ बदलती हैं, शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं

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Gen-Z और Gen-Alpha - नई पीढ़ी को दिशा देने की नई चुनौतियां (प्रवीण कक्कड़) शिक्षक साधारण नहीं होते, क्योंकि उनके सामने केवल विद्यार्थी नहीं, देश और समाज का आने वाला समय बैठा होता है। आज जिन बच्चों की सोच और व्यक्तित्व को वे आकार दे रहे हैं, कल वही परिवार, समाज और संस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हीं में भविष्य के डॉक्टर, वैज्ञानिक, उद्यमी, अधिकारी, शिक्षक और जनप्रतिनिधि होंगे। इसलिए शिक्षक का प्रभाव एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, वह उसके माध्यम से अगली पीढ़ी तक पहुँचता है। समय बदलता है, तकनीक बदलती है, पढ़ने-पढ़ाने के तरीके बदलते हैं और पीढ़ियाँ भी बदल जाती हैं, लेकिन शिक्षकों की जिम्मेदारी वही रहती है - नई पीढ़ी को अपनी क्षमताओं का श्रेष्ठ उपयोग करना सिखाना और सही दिशा देना। 2026 का शिक्षक दिवस इस जिम्मेदारी को नए संदर्भ में देखने का अवसर है। Gen-Z अब समाज और कार्यक्षेत्र में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रही है और उसके पीछे Gen-Alpha तेजी से तैयार हो रही है। यह पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीच बड़ी हुई है। उसके पास जानकारी भी ...