डिजिटल दुनिया में सब 'कनेक्टेड' हैं, फिर भी इतने अकेले क्यों?
फ्रेंडशिप डे पर एक सवाल, जो हर रिश्ते से जवाब मांगता है (प्रवीण कक्कड़) अगस्त का पहला रविवार आते ही बाज़ार रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड्स, उपहारों और ऑफर्स से सज जाते हैं। मोबाइल स्क्रीन शुभकामनाओं, रील्स और ट्रेंडिंग हैशटैग्स से भर जाती है। लेकिन इस उत्सव के बीच एक सवाल मन को बेचैन करता है - क्या डिजिटल युग में हम पहले से अधिक जुड़े हैं, या पहले से कहीं अधिक अकेले हो गए हैं? आज अधिकांश लोगों की कॉन्टैक्ट लिस्ट लंबी है, सोशल मीडिया पर सैकड़ों-हजारों दोस्त हैं, लेकिन क्या सचमुच हमारे पास ऐसा कोई है जिसे आधी रात को बिना झिझक फोन किया जा सके? जो हमारी सफलता पर सबसे ज्यादा खुश हो और असफलता में सबसे पहले हमारे साथ खड़ा दिखाई दे? शायद यही प्रश्न फ्रेंडशिप डे को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर बना देता है। वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस का वैश्विक संदेश "Embracing Diversity, Fostering Unity" (विविधता को अपनाना, एकजुटता को बढ़ावा देना) आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। तकनीक ने देशों और महाद्वीपों की दूरियां कम कर दी हैं, लेकिन विचारों, भाषा, संस्कृति और सामाजिक पहचान क...