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स्वतंत्रता की चेतना के साथ सशक्तीकरण की भावना भी जरूरी

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(प्रवीण कक्कड़) स्वतंत्रता के इतिहास से तो हम सभी परिचित हैं, हम जानतें हैं कि किन बलिदानों के फल स्वरूप हमें स्वाधिनता मिली। अब हमें वर्तमान पीढ़ी को यह सीखाने की जरूरत है कि स्वतंत्रता की चेतना के साथ सशक्तीकरण की भावना भी जरूरी है। तभी हम देश के विकास को सही दिशा में आगे बढ़ा सकेंगे। तभी देश में उत्साह का संचार संभव हो सकेगा। हमारी अर्थव्यवस्था सुदढ़ होगी और हम हर मोर्चे पर विकास के शिखर तक पहुंच पाएंगे। हमें वर्तमान पीढ़ी में सशक्तीकरण की भावना का विकास करने के लिए इसे चेतना के स्तर पर समझना और समझाना होगा। सशक्तीकरण के लिए जरूरी है कि अपनी परंपराओं, अपनी संस्कृति, अपनी भाषा और अपने वांग्मय को लेकर गौरव का अनुभव करें। अपने समृद्ध इतिहास को तलाशने का प्रयास करें और विस्मृत की गई ऐतिहासिक विभूतियों को अपना आदर्श बनाने की कोशिश करें। अगर चेतना के स्तर पर जाकर देखें तो भारतवर्ष कभी परतंत्र रहा ही नहीं। आक्रांताओं ने भारतवर्ष पर आक्रमण करके इस पर कुछ वर्ष तक शासन अवश्य किया, किंतु भारत की सशक्तीकरण की भावना को नष्ट करने में सफल नहीं हो सके। यही कारण है कि भारत अपने स्वतंत्रता के मूल्यों...

प्रकृति की गोद में बसा जानापाव, नियाग्रा फॉल्स सी खूबसूरती झलकाता पातालपानी

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 बारिश में इंदौर के करीब नजर आते हैं प्राकृतिक सौंदर्य के नजारे  ( प्रवीण कक्कड़)  बारिश के मौसम में प्रकृति का सौंदर्य देखते ही बनता है। इस दौरान इंदौर के आसपास भी हमें विश्वस्तरीय पर्यटन का आनंद मिल सकता है। बारिश में इंदौर प्राकृतिक सौंदर्य के नजारे भी बिखेरता है। इंदौर से महज कुछ ही दूरी पर इन स्थानों पर पहुंचकर हम प्रकृति से संवाद कर सकते हैं। पातालपानी का जलप्रपात जहां नियाग्रा फॉल सा नजर आता है, इस सौंदर्य को देखने के लिए रेलवे ने यहां हेरिटेज ट्रेन भी शुरू की है। वहीं जानापाव की पहाड़ी हरियाली की चादर औढ़े हमें आकर्षित करती है। इसके साथ ही चोरल, रालामंडल अभ्यारण्य सहित कई ऐसे स्थान हैं जो आपके विकएंड को सुहाना सफर दे सकते हैं। वर्षा ऋतु सारी प्रकृति से सौंदर्य को ही बदल देती है। प्राणियों के लिए वर्षा अमृत के बरसने के समान तुलनीय है। हर कण अपनी एक अलग छवि के साथ मुस्कुरा देता है, प्रकृति की इस खूबसूरती को देखकर। प्रकृति में वर्षा ऋतु में चारों ओर झम झम बूंदे बरसती हैं। बिजलियों की खनक से मन के सारे बंद दरवाजे खुल जाते हैं। वर्षा की बूंदों में भीग कर सारी धरा पून ख...

पौधरोपण करिये, ईश्वर खुश होंगे ज़िंदगी का रिटर्न गिफ्ट देंगे

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(प्रवीण कक्कड़) मानसून ने पूरे देश में दस्तक दे दी है। ईश्वर ने उसका काम कर दिया। अब हमारी बारी है। ईश्वर की नेमत को सहेजने और खूबूसरत बनाने की। यही सही वक्त है, बारिश के पानी को बचाने का, पौधरोपण का। आज हम पौधे रौपेंगे, यही पौधे ईश्वर तक हमारे अच्छे कर्मों का सन्देश पहुंचाएंगे। ये सन्देश वापस रिटर्न गिफ्ट की तरह वापस आएगा, अच्छी बारिश और आबोहवा के साथ। पौधरोपण से हमें हासिल होगी अच्छी हवा, पानी और ऑक्सीजन।  हर बार गर्मियों में बोरवेल सूख जाते हैं। नदियों बावड़ियों के किनारे सूखे दिखते हैं। ये सब पूरे बारह महीने हरे भरे रहेंगे। बस एक पौधा आप लगाइये। यदि हवा, पानी सही रहेगा तो ये धरती हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक खुशनुमा ज़िंदगी देगी।  हरियाली के बिना हमारा क्या हाल होगा इसका अंदाजा ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते हिस्से से देख, समझ ही रहे हैं।। हमारे जीवन के दो महत्वपूर्ण तत्व हैं जल और ऑक्सिजन। ऐसे में इस समय का सदुपयोग यही हो सकता है कि हम पर्यावरण संरक्षण को लेकर इन दोनों क्षेत्रों में सार्थक प्रयास करें।  आप सब जानते ही हैं कि जल है तो कल है। हमारी सभ्यता और संस्कृति नद...

आज़ाद भारत का अपना कानून, दंड से न्याय तक

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(प्रवीण कक्कड़) 1 जुलाई से हिंदुस्तान की पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। एक तरह से ये आज़ाद भारत का अपना कानून होगा। अब तक हम आईपीसी और सीआरपीसी जो 1862 में लाया गया था, उसके आधार पर ही काम कर रहे थे। आज़ादी के बाद 1974 में नया प्रारूप जरूर आया पर वो भी कुछ संसोधन से ज्यादा कुछ नहीं था। हमारा साक्ष्य अधिनियम भी 1872 में लागू किया गया था। इतने लम्बे वक्त में देश, समाज की शिक्षा, अपराध, समझ तीनो में बदलाव आया है। 200 साल के बाद हिंदुस्तान ने अपने खुद की भारतीय न्याय संहिता बनाई है, अब तक हम भारतीय दंड संहिता से देश को चला रहे थे, उम्मीद है दंड की जगह न्याय शब्द सिर्फ कागज़ों तक नहीं रहेगा ,आम आदमी तक पहुंचेगा। भारतीय न्याय संहिता अधिनियम के जरिये एनडीए सरकार ने न्याय व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने की कोशिश की  है। ये भी देखना होगा कि अंग्रेज़ों की शिक्षा पद्धति और कानून वाले इस देश में क्या वाकई गुलामी की मानसिकता से मुक्ति मिलेगी या पुलिस और ज्यादा आक्रामक होगी। इसका लाभ जनता तो मिलता दिख रहा है, पर कुछ धाराओं में पुलिस की तरफ झुकाव भी दिखता है। इसमें देश में...

पिता परिवार की नींव, हमारी बुनियाद हैं

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(प्रवीण कक्कड़) कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता। कभी धरती तो कभी आसमान है पिता।। भारत जैसे देश में पिता के लिए कोई एक दिन नहीं होता सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर...ठीक ऐसा ही पिता के साथ है।  पिता पृथ्वी पर तो साक्षात् भगवान  हैं। इसीलिए हम परमपिता को भी परमेश्वर कहते हैं। लेकिन जो पिता जन्म देता है, बचपन से लेकर जवानी तक हमें काबिल बनाता है। अपनी इच्छाओं को मारकर हमारी जरूरतों को पूरा करता है। दिन-रात अपने परिवार और संतानों के लिए परिश्रम करता है। उस लौकिक पिता का महत्व अलौकिक परमपिता से ज्यादा है। क्योंकि इससे संसार से परिचय हमें पिता ही कराता है। वह केवल हमें संसार में लेकर नहीं आता बल्कि संसार के महासागर में तैरना भी सिखाता है। पिता घरों की नींव है, पिता हमारी शान। कड़वा रुखवा नीम का, इसमें सबकी जान।। फादर्स डे या पिता दिवस पश्चिम की एक परंपरा हो सकती है लेकिन भारत में पिता का अर्थ बहुत गंभीर और महत्वपूर्ण है। भारत में पिता श्रद्धा और समर्पण का पर्याय है। यदि संतान पिता के प्रति श्रद्धा रखी है तो पिता भी संतानों के प्रति समर्पण का भाव रखता है। अपने पुरुषार्थ का...

मजदूर दिवस : हम ने हर दौर के हाथों को हिना बख़्शी है

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(मजदूर दिवस 1 मई पर विशेष)  (प्रवीण कक्कड़)  हम ने हर दौर में तज़लील सही है लेकिन  हम ने हर दौर के चेहरे को ज़िया बख़्शी है  हम ने हर दौर में मेहनत के सितम झेले हैं  हम ने हर दौर के हाथों को हिना बख़्शी है... साहिर लुधियानवी की इन पंक्तियों में मजदूरों का दर्द भी छुपा है और उनके योगदान का अक्स भी दिखाई देता है। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस दुनिया में अलग अलग नाम से मनाया जाता है। लेकिन भावना वही है, इस धरती को जिन्होंने बनाया है, उन मजदूरों को इज्जत और सम्मान देना। उनके वजूद को महसूस करना और उनके महत्व को समझना। और उनके अधिकारों को बाधित ना करना। दुनिया में सुई से लेकर अंतरिक्ष में जाने वाले राकेट तक, सड़क से लेकर गगनचुंबी इमारतों तक, शहर से लेकर गांव तक, साइकिल से लेकर प्लेन तक सब कुछ मजदूर ही तो बनाते हैं। मजदूर याने श्रमिक। इसलिए श्रम और श्रमिक का सम्मान जरूरी है। दुनिया के सभी मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या है श्रम का अवमूल्यन। लाभ का एक बड़ा हिस्सा जब पूंजीपति की जेब में जाता है तो श्रम का अवमूल्यन शुरू हो जाता है। और यहीं से शोषण शुरू होता है। यह शोषण सबसे ज्यादा...

अहिंसा और क्षमा का संदेश देता है भगवान महावीर का जीवन

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( प्रवीण कक्कड़ ) जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने समाज को अहिंसा और क्षमा का संदेश दिया। उनके उपदेशों से हमें सीख मिलती है कि हमें सत्य व अहिंसा के मार्ग पर अटल होना चाहिए, वहीं हर व्यक्ति से मैत्रीभाव रखना चाहिए, किसी भी व्यक्ति के प्रति हमारा बैर भाव नहीं होना चाहिए। महावीर जयंती का त्यौहार, सत्य, क्षमा, धर्म और आध्यात्मिक जागृति के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार साल पहले 540 ईसा पूर्व वैशाली राज्य के कुंडग्राम में क्षत्रिय परिवार में हुआ। विलासिता और ऐश्वर्य में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने सत्य और ज्ञान की आध्यात्मिक खोज शुरू करने के लिए भौतिक दुनिया को त्याग दिया। करीब 30 वर्ष की आयु में उन्होंने संसार से विरक्त होकर राजवैभव का त्याग कर दिया और आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। करीब 12 वर्षों की कठिन तपस्या में भगवान महावीर ने जिस ज्ञान की प्राप्ति की, उससे समाज को जागृत करने का प्रयास किया। उन्होंने सभी जीवित प्राणियों के कल्याण की वकालत की और सभी के लिए करूणा, सहिष्णुता और सम्मान का उपदेश दिया। करीब 72 वर्ष की आयु में उ...