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मध्य प्रदेश में बढ़ता प्रदूषण : क्या सांस लेना होगा मुश्किल ?

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- राष्ट्रीय प्रदूषण निवारण दिवस पर विशेष  (प्रवीण कक्कड़) दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो गया है, यह बात हम सभी जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश भी धीरे-धीरे दिल्ली की राह पर चल पड़ा है। मध्य प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। विशेषकर सर्दियों के मौसम में पराली जलाने और पटाखों के कारण वायु प्रदूषण अधिक बढ़ जाता है। हाल ही में जारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से यह बात साफ हो गई है कि मध्य प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 54 जिलों में से 13 जिलों को मॉडरेट, 37 जिलों को सेटिस्फेक्ट्री और महज 4 जिलों को अच्छी कंडीशन में रखा गया है। ये आंकड़े हमें आगाह करते हैं कि अगर हमने समय रहते कदम नहीं उठाए तो मध्य प्रदेश भी जल्द ही दिल्ली जैसी स्थिति का सामना कर सकता है। हमारी पृथ्वी प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, खासकर वायु प्रदूषण। यह समस्या न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2023-24 को लेकर ...

शॉर्टकट से नहीं मिलती सफलता

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(प्रवीण कक्कड़) हमारा देश आज युवाओं की उमंग से भरा हुआ है। हमारी युवा पीढ़ी नए तकनीक को अपनाने और रचनात्मक विचारों से दुनिया को बदलने की क्षमता रखती है लेकिन कुछ युवा ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर गलत रास्ते पर जा रहे हैं। कई ऑनलाइन एप उन्हें शॉर्टकट से पैसा कमाने का लालच देकर उन्हें इस जाल में फंसाते हैं। वे पैसे लगाने लगते हैं और जुआ-सट्टा के जाल में फंसते चले जाते हैं। याद रखें, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। आइए हम सभी मिलकर युवाओं को प्रेरित करें, माता-पिता, शिक्षक और समाज का हर सदस्य इस दायित्व को निभाए और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करें। जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत, अनुशासन और धैर्य अनिवार्य हैं। यह कोई नया सिद्धांत नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही सच्चाई है। फटाफट पैसा कमाने के चक्कर में युवा अपनी मेहनत को नजरअंदाज कर देते हैं और आसान रास्तों की तलाश में जुट जाते हैं। लेकिन यह रास्ता अक्सर उन्हें बर्बादी की ओर ले जाता है। गेमिंग और ऑनलाइन जुआ-सट्टा जैसी गतिविधियों में जीतने की संभावना बहुत कम होती है। अधिकतर लोग इसमें अपना पैसा गंवा देते हैं और कर्ज में डूब जाते है...

सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया...

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सेवा और समर्पण का संदेश देता है गुरु नानक जयंती पर्व (प्रवीण कक्कड़) कल्पना कीजिए, एक अंधेरे कमरे में अचानक एक दीपक जल उठे। अंधेरा छंटने लगता है और हर कोने में उजाला फैल जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ जब गुरु नानक देव जी इस संसार में प्रकट हुए। उनके आगमन से अंधकार को चीरती हुई ज्ञान की किरणें बिखर गईं। सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया... ये पंक्ति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले थी। गुरु नानक देव जी सिर्फ एक धार्मिक गुरु ही नहीं थे, बल्कि वे एक महान संत, दार्शनिक और समाज सुधारक भी थे। उनके उपदेशों ने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया। उन्होंने हमें सिखाया कि सभी मनुष्य एक हैं और हमें एक दूसरे से प्रेम और भाईचारा रखना चाहिए। गुरु नानक जयंती सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अवसर है जब हम गुरु जी के जीवन और उपदेशों पर चिंतन करते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई, न्याय और करुणा के मार्ग पर चलना चाहिए। गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव जी ने मानवता के लिए अन...

सेवानिवृत्ति : अनुभवी पारी का आग़ाज़

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- नई ऊर्जा और नये लक्ष्य के साथ करें नई शुरुआत (प्रवीण कक्कड़) शासकीय सेवाकाल में सेवानिवृत्ति की तारीख़ की गणना सेवा शुरूआत करने के दिन से ही शुरू हो जाती है। सारे लक्ष्य, सारे उसूल और सारे मापदंड को हम एक तारीख़ के साथ जोड़ देते है, जो कई बार नकारात्मक विचारों के साथ इसे सेवा का नहीं बल्कि ख़ुशियों का अंत दिखने लगता है। लेकिन हक़ीक़त इससे बिल्कुल परे है। सेवा निवृत्ति दर असल आपके दीर्घकालिक अनुभवों और हसरतों के साथ नये अध्याय की ज़ोरदार शुरुआत का शंखनाद होती है। मैने पिछले दो दिनों में ऐसी दो महान विभूतियों को खोया है, जिनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय सेवानिवृत्ति के बाद ही शुरू हुआ। पहले डॉ. एमएल भाटी जिन्होंने आदिवासी क्षेत्र राणापुर में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और पीड़ितों की सेवा और मानवता की सर्वश्रेष्ठ मिसाल बनकर लोगों के दिलों में राज करते रहे। दूसरे रिटायर्ड डीएसपी एनएस जादौन जिन्होंने सैकड़ो बुजुर्गों की सेवा की, उन्हें कानूनी अधिकार दिलाए और समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर प्रदान किया। वे रिटायरमेंट के बात से अपने जीवन की अंतिम सांस तक बुजुर्गों की सेवा में लग...

दीप जलाकर मन को जगाओ

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- इस दीपावली अंदर से भी जगमगाओ  (प्रवीण कक्कड़) आओ इस दीपावली अंदर से भी जगमगाएं, दीप जलाकर मन को भी जगाएं। दीपावली का त्योहार सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे अंदर के अंधकार को दूर करने और आत्मज्ञान जगाने का भी पर्व है। हम सभी को अपने अंदर के दीपक को जलाना चाहिए। हम सभी के जीवन में उतार.चढ़ाव आते रहते हैं लेकिन हमें कभी भी निराश नहीं होना चाहिए। हमें हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए और आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। इस दिवाली अंधकार से निकलकर उजाले की ओर बढ़ें। सारे त्योहारों का हमारे जीवन में बहुत गहरा महत्व है। यह सारे त्यौहार हमारी सभ्यता और संस्कृति में इस तरह से रचे बसे हैं कि असल में इन्हीं के माध्यम से समरस समाज का निर्माण होता है। हमारे त्यौहार सांस्कृतिक एकता की सबसे बड़ी धरोहर होने के साथ ही अर्थव्यवस्था का पहिया भी हैं। दीपावली के पर्व पर भगवान राम रावण का वध करके अयोध्या वापस आते हैं, जहां सारे नर नारी दीप जला कर उनका स्वागत करते हैं। इसीलिए यह दीपोत्सव है। दीपावली हमें सिखाती है कि अंधकार हमेशा के लिए नहीं रहता। थोड़ी सी मेहनत और लगन से हम अपने जीवन के किसी भी अंधक...

प्रेम, समर्पण और त्याग का प्रतीक है करवाचौथ का व्रत

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  (प्रवीण कक्कड़) आज भागदौड़ भरे समय में रिश्तो के बीच संवाद घटता जा रहा है, हर व्यक्ति केवल स्वयं पर केंद्रित होकर आगे बढ़ रहा है लेकिन इन सबके बीच भी अगर विश्वास, त्याग और गहराई की बात की जाए तो पति-पत्नी का रिश्ता ही काफ़ी मजबूत नजर आता है। इसकी गहराई का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि हर रिश्ते का नाम लेने के लिए हमें दो शब्दों की जरूरत होती है, जैसे मां-बेटा, बाप-बेटी, भाई-बहन, चाचा-भतीजा लेकिन सिर्फ एक रिश्ता ऐसा है जो एक ही शब्द में बयां हो जाता है जीवनसाथी। इसी कारण इस रिश्ते को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी रिश्ते के प्रति त्याग और समर्पण का प्रतीक है करवाचौथ। इस बार करवा चौथ व्रत 20 अक्टूबर को है। यह व्रत जहां पत्नी के पति के प्रति त्याग और समर्पण की भावना को बयां करता है, वही पति और पत्नी से भावनात्मक लगाव का भी परिचायक है। करवाचौथ… पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में सदियों से मनाया जाने वाला यह पर्व आज पूरे भारत का एक बहुत ही लोकप्रिय त्यौहार बन गया है। अगर भारत के बाहर का कोई व्यक्ति आकर इस त्यौहार को देख ले, तो वह निश्चित तौर पर इसे अत्यंत कठिन व्रत के तौर प...

दंड से न्याय तक - दिल की बात

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  साथियों नमस्कार आपको विदित होगा कि पिछले हफ्ते शिवना प्रकाशन ने मेरी पुस्तक *"दंड से न्याय तक"* का विमोचन किया है। आज उसी पुस्तक के कुछ पहलुओं को लेकर आपके समक्ष हूँ। मैंने अपने 40 साल के अनुभवों को एक किताब के रूप में सामने लाने की कोशिश की है। ये किताब भारतीय दंड संहिता से भारतीय न्याय संहिता तक के सफर पर केंद्रित है। एक जुलाई से भारतीय न्याय संहिता लागू हुई। इस किताब में भारतीय न्याय संहिता और भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी में क्या अंतर है इसको मैंने समेटने की कोशिश की है। मैंने सरल भाषा में स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि कैसे 358 धाराओं से भारतीय कानून में परिवर्तन आया है। इसमें पुलिस सुधार की अब तक की कोशिशे और कितनी बदली पुलिस इसका भी जिक्र है। इसमें उल्लेख है कि पुलिस सुधार को लेकर कौन से आयोग बने और उसके बाद क्या परिवर्तन आया। क्यों इंग्लैंड की स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस विश्व की सर्वश्रेष्ठ पुलिस कहलाती है। इसके साथ ही दुनिया की बेस्ट पुलिस फ़ोर्स कौन सी है और क्यों वो बेस्ट है इसके बारे में भी जानकारी है।  नया कानून किस तरह से बच्चों और महिलाओं की हिफाजत और मजबूती से...